आठ कूट
वर्ण (1 अंक) स्वभाव का मेल है। वश्य (2) आपसी आकर्षण है। तारा (3) दोनों जन्म नक्षत्रों की अनुकूलता है। योनि (4) स्वाभाविक अनुकूलता है। ग्रह मैत्री (5) दोनों चंद्र राशि स्वामियों की मित्रता है। गण (6) देव, मनुष्य और राक्षस स्वभाव का मेल है। भकूट (7) दोनों चंद्र राशियों का आपसी संबंध है। नाड़ी (8) स्वास्थ्य और प्रकृति का मेल है।
ध्यान दीजिए कि अंतिम तीन कूटों के अंक सबसे अधिक हैं। कुल अंक नाड़ी, भकूट और गण की ओर झुका है।
कुल अंक का अर्थ
18 से कम परंपरा में अनुशंसित नहीं, 18 से 24 स्वीकार्य, 25 से 32 अच्छा और 33 या अधिक उत्तम माना जाता है। ये परंपराएं हैं और क्षेत्र के अनुसार थोड़ा बदलती हैं।
अंक केवल दोनों की चंद्र स्थिति देखते हैं। बाकी कुंडली के बारे में, और लोगों के बारे में, यह कुछ नहीं कहते।
नाड़ी दोष और भकूट दोष
नाड़ी दोष तब होता है जब दोनों की नाड़ी एक हो, तब 8 में से 0 अंक मिलते हैं। परिवार इसे सबसे अधिक सावधानी से देखते हैं, क्योंकि नाड़ी स्वास्थ्य और संतान से जोड़ी जाती है। भकूट दोष तब होता है जब चंद्र राशियां 2 और 12 या 6 और 8 जैसी स्थिति में हों, तब 7 में से 0 अंक मिलते हैं।
दोनों के प्रचलित परिहार हैं, जैसे दोनों की चंद्र राशि का स्वामी एक होना। ये परंपरा के अनुसार बदलते हैं, इसलिए पारिवारिक ज्योतिषी की राय उपयोगी है।
इसे सही तरह कैसे उपयोग करें
गुण मिलान कीजिए, जो दोष दिखे उसे नोट कीजिए, फिर दोनों कुंडलियों में मंगल दोष, लग्न और चल रही दशा देखिए। AnkShakti का कुंडली मिलान हर कूट के अंक कारण सहित दिखाता है, ताकि पता चले अंक कहां कटे।
अपनी कुंडली बनाइए
आम सवाल
- अच्छा गुण मिलान अंक क्या है?
- परंपरा में 36 में से 18 न्यूनतम है, 25 से 32 अच्छा और 32 से ऊपर उत्तम।
- क्या कम अंक होने पर विवाह नहीं करना चाहिए?
- ज्यादातर परिवार इसे चर्चा का बिंदु मानते हैं, अंतिम निर्णय नहीं। पूरी कुंडली की समीक्षा और दोनों की वास्तविक अनुकूलता ज्यादा मायने रखती है।
- क्या गुण मिलान में जन्म समय ज़रूरी है?
- मुख्यतः चंद्र राशि और नक्षत्र चाहिए, इसलिए कुछ मिनट की गलती से फर्क नहीं पड़ता, जब तक चंद्रमा राशि या नक्षत्र की सीमा के पास न हो।