तीन चरण कैसे बनते हैं
पहला चरण: शनि आपकी चंद्र राशि से पिछली राशि में आता है। दूसरा चरण: शनि आपकी चंद्र राशि में होता है, जिसे परंपरा में सबसे भारी माना जाता है। तीसरा चरण: शनि अगली राशि में होता है और अवधि समाप्ति की ओर बढ़ती है।
हर चरण लगभग ढाई वर्ष का होता है। उदाहरण के लिए चंद्र राशि मेष हो तो साढ़ेसाती तब शुरू होती है जब शनि मीन में आता है और तब समाप्त होती है जब वह वृषभ से निकलता है।
चंद्र राशि से ही क्यों गिना जाता है
भारतीय ज्योतिष में चंद्र मन का कारक है, और शनि जैसे धीमे भारी ग्रह का उस पर से गुज़रना मन पर लंबे दबाव की तरह पढ़ा जाता है। इसलिए गिनती लग्न से नहीं, चंद्र राशि से होती है।
इसके लिए आपकी चंद्र राशि चाहिए, जो जन्म तिथि, समय और स्थान पर निर्भर है। कुंडली बनाइए, दोष वाला भाग बताएगा कि आज साढ़ेसाती चल रही है या नहीं।
परंपरा इसे कैसे देखती है
शनि प्रयास, अनुशासन और परिणाम का ग्रह है। परंपरा मानती है कि साढ़ेसाती धैर्य से किए काम को फल देती है और शॉर्टकट को उजागर करती है। कई लोग इन वर्षों को ज़िम्मेदारी और धीमे लाभ का समय बताते हैं।
यह साढ़े सात वर्ष की तय बुरी किस्मत नहीं है और कोई निदान भी नहीं। बाकी कुंडली, शनि की स्थिति और चल रही दशा भी तस्वीर बदलती हैं।
अपनी कुंडली बनाइए
आम सवाल
- साढ़ेसाती कितने समय चलती है?
- लगभग साढ़े सात वर्ष, ढाई-ढाई वर्ष के तीन चरणों में।
- क्या एक व्यक्ति को साढ़ेसाती कई बार आती है?
- हां। शनि को राशिचक्र का चक्कर लगाने में लगभग 29 वर्ष लगते हैं, इसलिए लंबे जीवन में दो या तीन बार आ सकती है।
- ढैया क्या है?
- जब शनि चंद्र राशि से चौथी या आठवीं राशि में हो तो लगभग ढाई वर्ष की ढैया कही जाती है। यह साढ़ेसाती से अलग पैटर्न है।